मुझे लगता है कि मेरे चीनी पढ़ने से मुझे सबसे ज़्यादा लाभ हुआ है अपनी ही इस हिन्दी भाषा को बेहतर समझने में. चीनी और हिन्दी भाषाओं में समानता से अंतर ज़्यादा हैं, लेकिन जो समानताएं हैं, वे बहुत ही रोचक हैं.
दोनों भाषाओं में एक बहुत ही दिलचस्प चीज़ है यह "मोडल पार्टिकल" की संकल्पना. मोडल पार्टिकल एक भाषाविदों के इस्तेमाल का शब्द है और इसका मतलब लगभग है एक छोटा सा शब्द जो अपने आप से एक वाक्य में ज़्यादा माइने नहीं रखता, परन्तु जिसका वाक्य के समग्र तात्पर्य पर प्रभाव पड़ता है. नीचे दीये गए इन चंद उदाहरणों से आपको समझ आ जाएगा मैं क्या कह रहा हूँ:
"यह बहुत ज़्यादा है, मुझसे और नहीं खाया जाएगा, तुम खालो ना."
"तुम खेलने क्यों नहीं आये?" "अरे भाई, मैं कल के टेस्ट के लिए पढ़ाई कर रहा था ना!"
"तुमने ठंडे दिमाग़ से सोच लिया है ना?"
"हैं! तुम पागल हो गए हो क्या?"
"आज तो मेरे पास टाईम नहीं है, मैं कल आता हूँ हाँ."
"हे भगवान्, तूने यह क्या कर डाला रे..."
"क्या है भाई?"
इन उदाहरणों में, जो शब्द मोटे अक्षरों में लिखे हुए हैं, वे "मोडल पार्टिकल" कहलाए जातें हैं (कम से कम, मेरे हिसाब से, इनको हिन्दी में मोडल पार्टिकल माना जाना चाहिए). इन शब्दों का काम होता है बोली में भावना डालना. अंग्रेजी में ऐसे शब्दों का ज़्यादा इस्तेमाल नहीं होता है, और मुझे लगता है कि इस ही लिए मैं जब गुस्सा होता हूँ, तो हिन्दी में ज़्यादा आसानी से दूसरे व्यक्ती तक अपनी भावनाएं पहुंचा सकता हूँ. ये शब्द वाक्य में केवल भावना डालने के लिए होतें हैं, इस बात का एक अच्छा सबूत यह है कि ऊपर लिखे उदाहरणों का मूल मतलब इन शब्दों को निकालने के बाद भी बिलकुल नहीं बदलता.
ऐसे शब्द चीनी और जापानी में भी भरे पड़ें हैं. चीनी में इन्हें "语气词" (यू-छी-थ्स) बुलाया जाता है जिसका अनुवाद होगा "भाषा भावना शब्द". जापानी में इन्हें "叙法の助詞" (जोहो-नो-जोशि) या "मोडल सहायक शब्द" बुलाया जाता है. इनके बारे में ज़्यादा जानकारी के लिए, विकिपीडिया पर भाषाविज्ञान से सम्बंधित लेख पढ़ सकतें हैं, परन्तु विकिपीडिया पर भी इन चीज़ों की जानकारी अभी बहुत कम है.
इस लेख का सम्पादन रुंगटा के हिन्दी ट्रांस्लिटरेशन उपकरण के द्वारा हुआ है.
दोनों भाषाओं में एक बहुत ही दिलचस्प चीज़ है यह "मोडल पार्टिकल" की संकल्पना. मोडल पार्टिकल एक भाषाविदों के इस्तेमाल का शब्द है और इसका मतलब लगभग है एक छोटा सा शब्द जो अपने आप से एक वाक्य में ज़्यादा माइने नहीं रखता, परन्तु जिसका वाक्य के समग्र तात्पर्य पर प्रभाव पड़ता है. नीचे दीये गए इन चंद उदाहरणों से आपको समझ आ जाएगा मैं क्या कह रहा हूँ:
"यह बहुत ज़्यादा है, मुझसे और नहीं खाया जाएगा, तुम खालो ना."
"तुम खेलने क्यों नहीं आये?" "अरे भाई, मैं कल के टेस्ट के लिए पढ़ाई कर रहा था ना!"
"तुमने ठंडे दिमाग़ से सोच लिया है ना?"
"हैं! तुम पागल हो गए हो क्या?"
"आज तो मेरे पास टाईम नहीं है, मैं कल आता हूँ हाँ."
"हे भगवान्, तूने यह क्या कर डाला रे..."
"क्या है भाई?"
इन उदाहरणों में, जो शब्द मोटे अक्षरों में लिखे हुए हैं, वे "मोडल पार्टिकल" कहलाए जातें हैं (कम से कम, मेरे हिसाब से, इनको हिन्दी में मोडल पार्टिकल माना जाना चाहिए). इन शब्दों का काम होता है बोली में भावना डालना. अंग्रेजी में ऐसे शब्दों का ज़्यादा इस्तेमाल नहीं होता है, और मुझे लगता है कि इस ही लिए मैं जब गुस्सा होता हूँ, तो हिन्दी में ज़्यादा आसानी से दूसरे व्यक्ती तक अपनी भावनाएं पहुंचा सकता हूँ. ये शब्द वाक्य में केवल भावना डालने के लिए होतें हैं, इस बात का एक अच्छा सबूत यह है कि ऊपर लिखे उदाहरणों का मूल मतलब इन शब्दों को निकालने के बाद भी बिलकुल नहीं बदलता.
ऐसे शब्द चीनी और जापानी में भी भरे पड़ें हैं. चीनी में इन्हें "语气词" (यू-छी-थ्स) बुलाया जाता है जिसका अनुवाद होगा "भाषा भावना शब्द". जापानी में इन्हें "叙法の助詞" (जोहो-नो-जोशि) या "मोडल सहायक शब्द" बुलाया जाता है. इनके बारे में ज़्यादा जानकारी के लिए, विकिपीडिया पर भाषाविज्ञान से सम्बंधित लेख पढ़ सकतें हैं, परन्तु विकिपीडिया पर भी इन चीज़ों की जानकारी अभी बहुत कम है.
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